मंगलवार, 18 सितंबर 2018

किस प्रकार के शत्रुओं से अधिक सतर्क रहना चाहिए ?

मनुष्य अपने जीवन काल में बहुत से मित्र और बहुत ज्ञात या अज्ञात शत्रुओं को बना लेता है। कभी कभी तो स्वयं के मित्र भी अज्ञात शत्रु के रूप में रहते हैं। ज्ञात शत्रुओं से अज्ञात शत्रु अधिक प्राणघातक होते हैं। ऐसे शत्रु धर्म ओर नीति कतपि नहीं मानते। ऐसे शत्रु हमेशा गुप्त रूप से आस पास ही रहते हैं और अपने लक्ष्य की प्रतीक्षा करते रहते हैं। जिस मनुष्य को जान से मारने का लक्ष्य रखते हैं। उसके विषय में वो सभी प्रकार के जानकारियां इकठा कर लेते है। जैसे की वह मनुष्य के कब खाता है, कब सोता है, कब भ्रमण करने निकलता है और कब युद्ध का अभ्यास करता है। इस स्थिति में मनुष्य को हमेशा सतर्क रहना आवश्यक होता है।

अज्ञात शत्रु कभी भी सामने से प्रहार नहीं करते वह तो हमेश छूप छूप कर ही वार करते है। अतः इस प्रकार के शत्रुओं से सतर्क रहना चाहिए अथवा इनसे पूर्वानुमान के अनुशार ऐसे शत्रुओं से निपटने के वारे मे सोचन चाहिए। ऐसे अज्ञात शत्रु भेष बतल कर भी लक्षित व्यक्ति के आस पास ही रहते है। जैसे की एक रसोइया के रूप में जो खाने मे विष दे सकता है या वैद्य के रूप में जो रोग के विपरीत किसी प्रकार का औषधि खिला दे जिस से रोग विगड़ जाये और प्राण जाने की संभावना बढ़ जाए। अज्ञात शत्रु किसी प्रिय मित्र या प्रेमिका के रूप में भी हो सकती है। यहां अज्ञात शत्रु का अर्थ सिर्फ उस शत्रु से नहीं है जो अज्ञात अवस्था में आपकी प्राण ले जाये। अज्ञात शत्रु का अर्थ उस शत्रु से भी है जो आपकी सभी गुप्त बातें आपके किसी परम शत्रु या समाज में प्रकशित कर दे। जिस से मान और समान की हानि होने की भी सम्भावना बनी रहती है। ऐसे शत्रु मुख्यतः मनुष्य का कोई मित्र या प्रेमिका होती है। जो गुप्त बातो को आपके परम शत्रु य सामज में प्रकशित करें।
कभी कभी तो मनुष्य का परामर्श दाता या उपदेशक के रूप में भी अज्ञात शत्रु रेह सकते हैं। जो आपको गलत परामर्श या उपदेश भी दे सकते है। अतः मनुष्य को अपने विवेक ओर बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए।