शनिवार, 21 मई 2022

बुद्धिमान मनुष्य को मूर्ख व्यक्ति से बाद विवाद कदापि नहीं करनी चाहिए।

बुद्धिमान मनुष्य कभी ना कभी मूर्ख मनुष्य के साथ बाद विवाद में पड़ ही जाता है। जिसके कारण बुद्धिमान मनुष्य खुद कष्ट में पड़ता है । कभी कभी तो बुद्धिमान मनुष्य को आर्थिक और जानमाल का नष्ट होने का भी खतरा बन जाता है। अतः बुद्धिमान मनुष्य को चाहिए की वो मूर्ख व्यक्ति से वार्तालाप कम या बाद विवाद करना परहेज करें । परहेज करने में ही बुद्धिमान मनुष्य का हित है।
एक कहानी है जो बुद्धिमान खरगोस और मूर्ख गधे की बीच चले बाद विवाद का । जो मुझे एक बनिया मित्र ने मुझे समझाया था। जिससे मैं मेरे जीवन में अवश्य ही अनुशरन करता हूं और मेरे जीवन में बहुद लाभ हुए हैं। वो कहानी कुछ ऐसा है।
गधा सबको बोल रहा था की आकाश का रंग पीला है। ऐसा बोलते बोलते खरगोश तक पहुंचता है और खरगोश को आकाश की तरफ देख कर बोलता है की आकाश का रंग पीला है। खरगोश आश्चर्य होकर कहा - ना आकाश कर रंग तो नीला है। इस से गधा थोड़ा गुस्से में आकर कहा नहीं आकाश का रंग पीला है तुम्हे कुछ नहीं पता है। खरगोश असमंजस में था की ये गधा क्या बोल रहा है। खरगोश के ज्ञान के अनुसार आकाश का रंग तो नीला है और अनुभव से आकाश नीला ही दिखता है। गधा अपनी बात पर ही अड़ गया न टस से मस हुआ और ना ही वो खरगोश की बात सुनना चाहता था। खरगोश भी अपनी जिद्द पर अड़ गया की वो गधे से ये मनवा के रहेगा की आकाश नीला है। खरगोश ने गधे से कहा चलो किसी से भी पूछ लो की आकाश नीला है। बारी बारी कर आते जाते सबसे से पूछते पर कोई कुछ उत्तर नहीं देता। अंत में गधे ने कहा ठीक है । जंगल के राजा शेर के पास जाते है और वो जो बोलेंगे वो सही होगा। दोनो शेर के पास जाते है और अपने बाद विवाद का विषय उसे बताते हैं। शेर थोड़ा समय सोचता है और ये आदेश देता है की खरगोश को बंदी बना लो और जेल में डाल दो। खरगोश डर जाता है और आश्चर्य हो जाता है की शेर ऐसा कैसे कर सकता है क्योंकि वो सही है इस विषय में। खरगोश जेल में कई दिन गुजार देता है । फिर किसी दिन खरगोश को शेर से मिलने का मौका मिलता है तो खरगोश शेर से पूछता है की गधे और उसके बीच हुई बाद विवाद में वो सही था फिर भी आपने मुझे जेल में डाल दिया लेकिन क्यों। तब शेर कहता है की मैने तुम्हे जेल में इसलिए नहीं डाला की तुम सही हो या गलत । मैने इसलिए जेल में डाल की तुम ज्ञानी और बुद्धिमान हो और तुमने अपने बराबरी के लोगों से बाद विवाद नहीं किया और गधे से बाद विवाद कर बैठे और उसे समझाने में जिद्द पकड़ लिए। तुम्हे जेल में डाल था तुम्हारी सीख के लिए ताकी तुम समझ जाओ की अज्ञानी को समझाना समय की बरबादी और ज्ञान का नष्ट होना है। तुमने अपना समय भी व्यर्थ किया, आते जाते लोगों का समय भी नष्ट किया और मेरा भी समय नष्ट किया। तुम्हे पता है । आते जाते लोगों को ये पता था की तुम सही हो फिर किसी ने कुछ कहा नहीं। क्योंकि की उन्हें पता था की गधा इसे कभी नहीं मानेगा। खरगोश को अपनी भूल समझ में आ गई थी और उसने शेर को धन्यवाद दिया इस सीख के लिए और अपने घर चला आया । इस कहानी के सारांश स्वरूप ये सामने आता है की मूर्ख को एक बार ही ज्ञान दो अगर माने तो ठीक । नहीं तो कदापि उसे बाद विवाद नहीं करनी चाहिए।
धन्यवाद, 🙏 जय जगन्नाथ💐

सबके अहंकार का शत्रु समय है।

प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन में किसी ना किसी बात को लेकर अहंकार करता ही है। मनुष्य को अहंकार आना एक स्वाभाविक क्रिया है। पर इसे नियंत्रण में रखना अति आवश्यक है। क्योंकि प्रत्येक जीव को अपने आप पर अहंकार होता ही है। पर उस अहंकार को बाहर नहीं आने देना चाहिए और उसका कुप्रभाव संसार पर नहीं पड़नी चाहिए। जंगल में रहनेवाला शेर भी अपने आप को अहंकार वस जंगल का राजा मान लेता है और ऐसा सोचता है की जंगल में सब कुछ उसके अधीन है । सिर्फ तब तक जब तक उसके सामने कोई समान शक्ति वाला शेर या अधिक शक्तिवाला शेर उस जंगल में नहीं आ जाता। 
ऊंट और पहाड़ की एक संक्षिप्त कहानी है जो उनके अहंकार से संबंधित है। कहानी कुछ ऐसी है । मरुभूमि में रहने वाला ऊंट भी अपने आप को ऊंचा मानकर अहंकार करता है की इस दुनिया में उसे कोई ऊंचा नहीं है। सिर्फ तब तक जब तक ऊंट पहाड़ के नीचे नहीं आता । पहाड़ के नीचे आने से ऊंट का अहंकार चूर चूर हो जाता ही। उसी तरह पहाड़ को भी अहंकार होता है की उसके जैसा संसार में कोई ऊंचा नहीं है और उसे कोई चढ़ नही सकता। पर समय आने पर एक ऊंट भी उस पहाड़ के ऊपर चढ़ जाता है और पहाड़ उस ऊंट के नीचे होता है। तो कहने का तात्पर्य ये है की बड़ा कौन है। कुछ लोग कहेंगे पहाड़ और कुछ लोग कहेंगे ऊंट। पर में मेरे समझ से कहूंगा "समय" जिसने दोनो को बड़ा बनने का मौका दिया पर अहंकार के घेरे में दोनों आ गए। समय से ऊंचा और समय से बड़ा शक्तिशाली कोई नहीं है। अतः अहंकार करना इस मनुष्य जीवन में पूरी तरह से व्यर्थ ही है। हां ये स्वभाव में है। मनुष्य का स्वभाव भी ज्ञान प्राप्त करना और अहंकार को ज्ञान के द्वारा नियंत्रण में रखना ।

हरी ॐ 🙏