गुरुवार, 11 जनवरी 2018

किस प्रकार के मनुष्यों को ज्ञान देना चाहिए और किस प्रकार के मनुष्यों को ज्ञान नहीं देनी चाहिए।

नीति शास्त्रों मे अगर ये कहा गया है की किस प्रकार के लोगों से ज्ञान ग्रहण करनी चाहिए । तो नीति शाश्त्र के अंतर्गत ये भी कहा गया है की किस प्रकार के लोगों को ज्ञान देनी चाहिए और किस प्रकार के लोगों को ज्ञान नहीं देनी चाहिए। ज्ञान देना और नहीं देने का प्रयोजन समाज और मनुष्य की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मानते है। ज्ञान उसे ही देनी चाहिए जो उस ज्ञान को पानेका सामर्थ्य और योग्यता रखते है। सदैब ये ध्यान रखनी चाहिए की जब हम किसी को विशेष ज्ञान देते है। उस मनुष्य की परीक्षा भी ले लेनी चाहिए की वो उस ज्ञान का अधिकारी है या नहीं। अन्यथा समाज में रहनेवाले लोगों का जीवन अशुरक्षित हो जायेगी। इसी कारण ऋषि मुनियों ने मंत्र और तंत्र आदि रहष्य मई विद्याओं को साधारण मनुष्यों से दूर रखा था।

जिस प्रकार आज किसी भी क्षेत्र में तकनीकी पढ़ाई के लिए विशेष परीक्षाएं देनी पड़ती है। उसी तरह प्राचीन काल में गुरु उनके शिष्यों से विशेष परीक्षा लेते थे। ये परीक्षायें उनके स्वभाव, सोच, उनकी व्यक्तित्व और मानसिकता पर आधारित होती थी। उन परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने वाले को ही गुरु विशेष ज्ञान देते थे।

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