बहुत से आध्यात्मिक गुरु हमेशा ही ये ज्ञान बांटते फिरते हैं की ये संसार दुःखों का घर है। अतः इन सबका त्याग करनी चाहिए। इस भौतिक संसार को छोड़ने की बात करते हैं और कहते हैं। भोगों से दूर रहो। उन मूर्ख आध्यात्मिक गुरुओं को ये ज्ञात भी नहीं की यह मत्य लोक अर्थात भौतिक लोक भोगो के लिए ही बनाई गयी है और मनुष्य ने अनेको प्रकार के भोग के लिए ही जन्म लिया है । ताकि वो अपने भोग कामनाओं को पूरा कर सके। क्योंकि जब तक भोग की इच्छा समाप्त नहीं होती तब तक किसी भी प्राणि को मोक्ष प्राप्त नहीं होता। अतः अवश्य ही सभी प्रकार के भोग को भोगना चाहिए। यंहा सभी प्रकार के भोगो का तातपर्य धर्म युक्त प्राप्त सभी भोगो को।
मनुष्य को अगर संसार में रहना है और जीवन यापन करना है । तो अवश्य ही उसे भोग भोगने पड़ेंगे। अगर वो संसार के खाद्य पदार्थो को त्याग करता है और भोजन को नहीं खाता है तो वो अधिक समय तक जीवित भी नहीं रह सकता।
पर संसार में मनुष्य को अगर रहना है तो कमल के फूल के भांति रहना चाहिए। जिस प्रकार कमल पानी में रहकर भी पानी से गीला नही होता उसी प्रकार मनुष्य को संसार के सभी भोगों को भोग कर उन भोगों के मोह से छूट जाना चाहिए। संसार के भोग भोगने की कामना कदापि नहीं रखनी चाहिए। मनुष्य को संसार के सारे क्रिया कलापो को करने के बाद भी उसमे अपना मन का मोह विल्कुल नहीं रखनी चाहिए अर्थात मन के लगाव को प्रभु के प्रति ही लगाना चाहिए।
जब कमल का फूल पानी के कीचड़ में खिलता है और संसार को अपने सुंदरता का परिचय देता है। जिस पानी मे कमल खिलता है वो पानी उसके भोग के समान है। उस पानी के कीचड़ और दल दल उस कमल के फूल के लिए सांसारिक दुःख के समान है। अतः भोग और दुःखो से उप्पर उठना चाहिए।
पर संसार में मनुष्य को अगर रहना है तो कमल के फूल के भांति रहना चाहिए। जिस प्रकार कमल पानी में रहकर भी पानी से गीला नही होता उसी प्रकार मनुष्य को संसार के सभी भोगों को भोग कर उन भोगों के मोह से छूट जाना चाहिए। संसार के भोग भोगने की कामना कदापि नहीं रखनी चाहिए। मनुष्य को संसार के सारे क्रिया कलापो को करने के बाद भी उसमे अपना मन का मोह विल्कुल नहीं रखनी चाहिए अर्थात मन के लगाव को प्रभु के प्रति ही लगाना चाहिए।
जब कमल का फूल पानी के कीचड़ में खिलता है और संसार को अपने सुंदरता का परिचय देता है। जिस पानी मे कमल खिलता है वो पानी उसके भोग के समान है। उस पानी के कीचड़ और दल दल उस कमल के फूल के लिए सांसारिक दुःख के समान है। अतः भोग और दुःखो से उप्पर उठना चाहिए।

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