शनिवार, 21 मई 2022

सबके अहंकार का शत्रु समय है।

प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन में किसी ना किसी बात को लेकर अहंकार करता ही है। मनुष्य को अहंकार आना एक स्वाभाविक क्रिया है। पर इसे नियंत्रण में रखना अति आवश्यक है। क्योंकि प्रत्येक जीव को अपने आप पर अहंकार होता ही है। पर उस अहंकार को बाहर नहीं आने देना चाहिए और उसका कुप्रभाव संसार पर नहीं पड़नी चाहिए। जंगल में रहनेवाला शेर भी अपने आप को अहंकार वस जंगल का राजा मान लेता है और ऐसा सोचता है की जंगल में सब कुछ उसके अधीन है । सिर्फ तब तक जब तक उसके सामने कोई समान शक्ति वाला शेर या अधिक शक्तिवाला शेर उस जंगल में नहीं आ जाता। 
ऊंट और पहाड़ की एक संक्षिप्त कहानी है जो उनके अहंकार से संबंधित है। कहानी कुछ ऐसी है । मरुभूमि में रहने वाला ऊंट भी अपने आप को ऊंचा मानकर अहंकार करता है की इस दुनिया में उसे कोई ऊंचा नहीं है। सिर्फ तब तक जब तक ऊंट पहाड़ के नीचे नहीं आता । पहाड़ के नीचे आने से ऊंट का अहंकार चूर चूर हो जाता ही। उसी तरह पहाड़ को भी अहंकार होता है की उसके जैसा संसार में कोई ऊंचा नहीं है और उसे कोई चढ़ नही सकता। पर समय आने पर एक ऊंट भी उस पहाड़ के ऊपर चढ़ जाता है और पहाड़ उस ऊंट के नीचे होता है। तो कहने का तात्पर्य ये है की बड़ा कौन है। कुछ लोग कहेंगे पहाड़ और कुछ लोग कहेंगे ऊंट। पर में मेरे समझ से कहूंगा "समय" जिसने दोनो को बड़ा बनने का मौका दिया पर अहंकार के घेरे में दोनों आ गए। समय से ऊंचा और समय से बड़ा शक्तिशाली कोई नहीं है। अतः अहंकार करना इस मनुष्य जीवन में पूरी तरह से व्यर्थ ही है। हां ये स्वभाव में है। मनुष्य का स्वभाव भी ज्ञान प्राप्त करना और अहंकार को ज्ञान के द्वारा नियंत्रण में रखना ।

हरी ॐ 🙏

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