बुधवार, 6 सितंबर 2023

क्या प्याज और लहसुन मांसाहार है सनातन धर्म है?

 क्या प्याज और लहसुन मांसाहार है? हमारे सनातन धर्म में बहुत से कहानियां हैं जो प्याज और लहसुन से जोड़ दिया गया है। इसकी वास्तिविकता के बारे में जानेंगे। जितने भी वैष्णव संप्रदाय के लोग है वो प्याज, लहसुन और मसूर की दालों का सेवन नहीं करते क्योंकि की वो इसे मांशहार मानते है। मांसाहार भोजन को आमिश और शाकाहार भोजन को निरामिष भी कहा जाता है। इस दो प्रकार के भोजन के अलावा दो और प्रकार के भोजन भी है तामसिक और सात्विक भोजन। मांसाहार भोजन को हम तामसिक भोजन कह सकते हैं। पर प्याज लहसुन जिस भोजन में उपयोग हुआ हो उसे मांसहार भोजन नहीं कह सकते जब तक उसमे किसी जीव का मांस उपयोग नहीं हुआ हो। सभी मांसहार भोजन तामसिक है। पर सभी तामसिक भोजन मांसहार नहीं है। ऐसा क्यों, प्याज, लहसुन और मसूर की दाल खाने से मनुष्य में गर्मी पढ़ती है और तामसिक प्रवृति का उदय होता है। जो सात्विक व्रत या साधना करते हैं। ये उनके साधना मार्ग में रुकावट उत्पन करेगा और उलझा देगा। अतः इसी कारण वैष्णव और सात्विक मार्ग में ऐसे भोजनों का सेवन नहीं करते है। प्याज, लहसुन और मसूर ये पौधों से ही प्राप्त होते हैं। इसी कारण इसे बहुत से लोककथाओं को जोड़ दिया गया है। मेरी मम्मी से भी मेने एक ऐसे ही कहानी सुनी थी। जिसमें एक ऋषि था जो गलती से एक राक्षसी से शादी कर लिए । उस ऋषि का एक गाय था। तो वो ऋषि एक दिन स्नान करने गया था और वो राक्षसी को मांस खाने का मन हुआ तो उसने वो गाय को मारकर उस के मांस को पक्का लिया और खा गई। उस गाय का सिर्फ चमड़ा बचा था । उसका पति वो चमड़ा देखकर श्राप दे देगा जानकरके उसने वो चमड़ा को जमीन में गाढ़ देता है और पति को बोलती है की गाय कहीं खो गई है। कुछ दिन के पश्चात उस चमड़े से उसकी बाहर की परद से लहसुन का पौधा और अंदर के रक्तवाले परद से प्याज का पौधा जन्म लेता है। तो वो ऋषि को पता चलता है तो वो अपने पत्नी को श्राप देकर मार डालती है। ऐसी अनेकों कहानी है जो प्याज और लहसुन से जुड़ी हुई है। साधारण लोगों को समझाने के लिए ये कहानी बनाई।गई थी क्योंकि चमड़े से पौधों का जन्म संभव नहीं हो सकता। प्रॉब्लम प्याज लहसुन और मसूर के गुण स्वभाव से है। प्याज और लहसुन आयुर्वेद के अनुसार शरीर में ऊष्मा वीर्य बनाती है। जिससे कामुक भाव मतलब सेक्सुअल डिजायर्स को बहुत बढ़ता है। जो अध्यात्म मार्ग का शत्रु है। इसिकरण इसे वैष्णव और सात्विक साधक सेवन नहीं करते है। प्याज और लहसुन में बहुत से औषधि गुण भी रखते है। अतः इसे मांसहार कहना गलत है। हां पर ये तामसिक जरूर है।

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