रविवार, 14 मार्च 2021

किस तरहा के लीगों के साथ संगत करनी चाहिए?

मनुष्य के जीवन में बहुत से लोग आते हैं और चले जाते हैं। पर कुछ लोगों का प्रभाव उस मनुष्य के जीवन भर रहता ही हैं। यह प्रभाब अच्छे भी हो सकते है और खराब भी हो सकते हैं। जैसे बुजुर्गो ने कहा है अच्छे लोगों के साथ रहोगे तो अच्छा बनोंगे और बुरे लोगों के साथ रहोगें तो बुरा बनोगे। बहुतसिं कहावतें भी हमारे समाज में प्रचालित है । जैसे कि " एक गंदी मछली पूरी तालाब को गंदी कर देती हैं" और "एक खराब आम टोकरी में रखे हुए सभी आमों को खराब कर देती है। अतः किसी भी मनुष्य को समाज स्व बहिस्कृत मनुष्य का संगत कतापी नहीं करनी चाहिए। जिस मनुष्य का समाज में कोई पहचान नहीं सम्मान नहीं उनका संगत कतापी नहीं करनी चाहिए। अगर कोई उसका संगत करता है तो उस मनुष्य की व्यक्तित्व भी वैसा ही माना जाता है। अगर मान लिया जाए कि एक शराबी हैं जो हमेशा नशे में धूत रहता है और उसका एक मित्र है जो उसके साथ हमेशा रहता है। अगर उसका मित्र ये कहता है कि वो शराब नही पिता तो कतापी कोई उसकी बातों पे विश्वाश नहीं करेगा। चोर का मित्र जो हमेशा चोर के साथ रहता है और कहे कि चोरी उसने नहीं कि । तो पुलिस कभी उसकी बात मान नहीं सकते।
यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि जो मनुष्य जिसके साथ अधिक समय रहता है । उसकी मानशिकता उसके जैसे ही हो जाती है। चाहे वो मनुष्य कितना ही दृढ़ निश्चयी क्यों ना हो। अपराधी प्रबृत्ति के लोगो के साथ रहने से अपराधी जैसे मानशिकता हो जाती है और अंततः आपराधिक प्रवृतियों में सलंग्न हो जाते है। अगर मनुष्य ज्ञानी और आध्यात्मिक विचार वालोँ के साथ अगर अधिक समय गुजारता है तो वो ज्ञानी और अध्यात्म वादी बनता हैं। 
जो मनुष्य सदा दुःखी रहने वाले के साथ समय।व्यतीत करता है । वो मनुष्य भी सदा दुःखी रहता है। एक व्यक्ति की मनोस्थिति दुशरे मनुष्य के मन पर भी पड़ता है। अतः सदा खुश मिज़ाज़ मनुष्य का संगत करें। मनुष्य अगर आपराधिक प्रबृत्ति, दुःखी, चुगल खोर, नीच मानशिकता और समाज से बहिस्कृत मनुष्य का संगत करता है तो उसे भी समाज का तिरस्कार शुननी पड़ेगी और उसकी मानशिकता भी वैसे ही हो जाएगी। अपने संगत को अवश्य ही सुधारना चाहिए और अच्छे लोगों का संगत करनी चाहिए। जैसे ही कोई अच्छे लोगों का संगत चालू कर देता है वैसे ही बुरे संगत का असर खत्म होना सुरु।हो जाता है।

जय महाकाल

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